मेरे महबूब मेरी हस्ती को यूँ नफ़रत से तो न देख,
हमने मोहब्बत भरे ख्वाबों को सजाया था कभी.
हम जुदा होंगे अलग ख्वाबों की दुनिया होगी,
ये तसव्वुर भी मेरे ज़हन में न आया था कभी.
हो सके ख़्वाब न पूरे मगर खुश तो है तू,
अपनी खुशियों का तो मैं ज़िक्र भी न लाया था कभी.
तेरी तमन्नाएँ हों पूरी बड़ी तहज़ीब के साथ ,
अब न हो शायद मगर उनमे मेरा साया था कभी !
हमने मोहब्बत भरे ख्वाबों को सजाया था कभी.
हम जुदा होंगे अलग ख्वाबों की दुनिया होगी,
ये तसव्वुर भी मेरे ज़हन में न आया था कभी.
हो सके ख़्वाब न पूरे मगर खुश तो है तू,
अपनी खुशियों का तो मैं ज़िक्र भी न लाया था कभी.
तेरी तमन्नाएँ हों पूरी बड़ी तहज़ीब के साथ ,
अब न हो शायद मगर उनमे मेरा साया था कभी !

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