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दीवान ए सैफ़

मेरे हर शेर में एक कहानी है, हर कहानी मे बोहोत से क़िस्से हैं, उन किस्सों की बोहोत सी यादे हैं, उन यादो में बोह्तो के हिस्से हैं!

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Saturday, July 3, 2010

9) आखरी ख़त !

भूले नहीं जाते हैं मुझसे दिन वो पुराने,
जन्नत से थे रौशन वो ख्वाबो से सुहाने !
         हैं जज़्ब वो दिन अज भी किसी हिस्से में मेरे दिल के,
         वो मौसम चार, जो हमने, गुज़ारे थे कभी मिल के !
अब वो मौसम न कभी लौट के फिर आयेंगे,
वक़्त गुजरेगा कभी हम नही गुज़र जायेंगे !
        एक गुज़ारिश है हमे भूल भले ही जाना,
        पर उन लम्हों को सदा दिल से लगा कर रखना,
थीं वो नेमत जिनको ता-उम्र जानें तरसीं हैं,
बोहोत कम वक़्त, पर है शुक्र, हमपे बरसी हैं ,
        मुझको हर वो क़िस्सा हर मुलाक़ात याद है अब भी,
        हर दिन वो मिलना, रातों को करना बात याद है अब भी,
अब भी तेरी खुशबु मेरी साँसों से आती है मुझको,
अब भी तेरे होंटों की नरमी छू के जाती है मुझको,
        आज  भी वो रुमाल का क़िस्सा याद कर के हँसता हूँ मैं,
        जहाँ हम मिलते थे, कुछ देर वहां जा के बस्ता हूँ मैं ,
पता है तुमको अब भी हमारे नाम के निशां उस पेड़ पे हैं,
फर्क इतना है के अब उनके साथ और भी कई नाम ढेर से हैं !
       अक्सर बहते पानी पे जा के अक्स देखा करता हूँ,
       अब भी उस दरया से मैं जा के मिला करता हूँ,
जिसके किनारे पे हम कई वादे किया करते थे,
याद रखेंगे ये दिन, ये इरादे किया करते थे,
       अब न वो पीपे का पुल है न हवा के झोंके,
       न ही वो पगडण्डी, निकलते थे जिनपे हम होके,
दिल करता है अपने हाथों से खिलाऊ तुमको,
फिर तुम्हे छेड़ूँ , रुलाऊं, मनाऊं तुम को,
       अच्छा हुआ के तुम भूल गए हो सब कुछ,
       तड़पते तुम भी, जो याद आ जाता बस कुछ,
ये मेरा आखरी ख़त है, के जा रहा हूँ मैं,
तेरी दुनिया से दूर दुनिया बसा रहा हूँ मैं,
       बोहोत मुश्किल है अब और तेरे शहर में जीना,
       जहाँ तेरी याद न हो ऐसी कोई जगह बची न,
इतने आंसू अब मैं और नहीं बहा सकता,
लम्बी रातों को मुझसे और नहीं जगा जा सकता,
       बस दुआ मेरी है तुझे खुशियाँ और क़रार  मिले,
       जिस क़दर चाहा है मैंने तुमको उतना प्यार मिले,

This khat in my voice..
Posted by Dr. Saif Zahid at 3:16 PM Email ThisBlogThis!Share to XShare to FacebookShare to Pinterest

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