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दीवान ए सैफ़

मेरे हर शेर में एक कहानी है, हर कहानी मे बोहोत से क़िस्से हैं, उन किस्सों की बोहोत सी यादे हैं, उन यादो में बोह्तो के हिस्से हैं!

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Sunday, August 1, 2010

11) मेरे साथ चलना तू छोड़ दे !!

मेरे हमसफ़र मेरी बात सुन , मेरे साथ चलना तू छोड़ दे !!
मेरी राह है ये बहोत कठिन , मेरे साथ चलना तू छोड़ दे !!

मेरी ज़िन्दगी में हैं रंग कम, मेरे साथ हैं दर्दो अलम,
यहाँ पाएगा तू रंजो ग़म, मेरे साथ चलना तू छोड़ दे !!

तू अगर है सुबह तो हूँ मैं शब, जो मिलेंगे हम तो मिलेंगे कब,
यही इल्तेजा है मेरी बस अब, मेरे साथ चलना तू छोड़ दे !!

चाहे दिल में तू मेरा नाम ले, पर ज़ुबां से कुछ न तू काम ले,
मैं जो कह रहा हूँ वो मान ले, मेरे साथ चलना तू छोड़ दे !!

भले लाख मुझसे तू हो ख़फ़ा, कहे बारहा मुझे बेवफ़ा ,
है तेरा भला जो करूँ जफ़ा, मेरे साथ चलना तू छोड़ दे !!

मुझे हौसला दे के सह सकूँ , तेरे बिन मैं जिंदा भी रह सकूँ,
दे ये हक मुझे के मैं कह सकूँ, मेरे साथ चलना तू छोड़ दे !!

तू करेगा मुझसे जो इतना प्यार, तो रहेगा खुद पे ना इख्तेयार,
यही "सैफ" कहता है बार बार, मेरे साथ चलना तू छोड़ दे !!!!!
Posted by Dr. Saif Zahid at 9:00 PM 0 comments Email ThisBlogThis!Share to XShare to FacebookShare to Pinterest
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