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दीवान ए सैफ़

मेरे हर शेर में एक कहानी है, हर कहानी मे बोहोत से क़िस्से हैं, उन किस्सों की बोहोत सी यादे हैं, उन यादो में बोह्तो के हिस्से हैं!

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Saturday, July 3, 2010

(3) गर मुझको प्यार है !

सौ मुश्किलें, सौ रंजिशे, गर मुझको प्यार है.
हर एक को शिकायत है, गर मुझको प्यार है.

ये क्या है , ऐसा क्यूँ है, कहाँ की भलाई है ,
क्यूँ ज़िन्दगी आसां नहीं गर मुझको प्यार है.
Posted by Dr. Saif Zahid at 1:13 PM Email ThisBlogThis!Share to XShare to FacebookShare to Pinterest

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