नज़रें मिलीं, बातें बढ़ीं, अब और भी अरमान हैं..
ख्वाहिशें बढ़ती ही जाती हैं, महज़ इन्सान हैं.
देखने में भोले भाले पर वो बेईमान हैं..
दिल चुरा के चल दिए हैं, नाम के जो खान हैं..
देखिये अब मेरी जानिब उनका क्या फ़रमानहै,
जान बख्शेंगे मेरी , या क़त्ल का ऐलान है.
सैफ़ उनकी शोख़ नजरों को ज़रा फिर याद कर,
पूरी करनी है ग़ज़ल, जिसका वो उन्वान हैं..
ख्वाहिशें बढ़ती ही जाती हैं, महज़ इन्सान हैं.
देखने में भोले भाले पर वो बेईमान हैं..
दिल चुरा के चल दिए हैं, नाम के जो खान हैं..
देखिये अब मेरी जानिब उनका क्या फ़रमानहै,
जान बख्शेंगे मेरी , या क़त्ल का ऐलान है.
सैफ़ उनकी शोख़ नजरों को ज़रा फिर याद कर,
पूरी करनी है ग़ज़ल, जिसका वो उन्वान हैं..

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