शायेद हम भी हों कभी उन शायेरों की तरह ,
जो पहोचे तो बुलंदी पे जब ज़मी पे न रहे.
वो जो ताक़त वर थे करते थे दुनिया पर फ़तेह,
ज़िन्दगी की जंग में वो अब कही पे न रहे.
जो पहोचे तो बुलंदी पे जब ज़मी पे न रहे.
वो जो ताक़त वर थे करते थे दुनिया पर फ़तेह,
ज़िन्दगी की जंग में वो अब कही पे न रहे.

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